आज पितृदिन...
अब्राहम लिंकन ने हेडमास्तरांस लिहिलेल्या पत्राचा हा अनुवाद रात्री नऊच्या Fathers' Day special बुलेटिन साठी कवितारूपात लिहिला होता. १५ मिनिटांच्या डेडलाईनमुळे हात थरथरत होता, पण जमून गेलं.... आणि संपवतांना इतकं भरून आलं! :)
(
हा मूळ पत्राचा अनुवाद नाही. वसंत बापटांच्या रूपांतरावरनं लिहिला आहे. :D
वरील इंग्रजी दुवा विद्या भुतकर ह्यांच्या सौजन्याने)
__________________________________________________मेरा लाल जानेगा कि सभी लोग इंसाफ़परस्त नहीं होते,
मगर उसे यह सिखाएं कि हर बदमाश के साथ, एक साधू भी इस दुनिया में आता है.
खुदगर्ज़ राजनेता भी होते हैं, वैसे ही जीवन लुटाने वाले नेता भी.
मैं जानता हूँ कि सब कुछ जल्दी में नहीं सीखा जाता,
पर उसे यह मालूम हो, के पसीने से सींचा एक सिक्का, लूट के खज़ाने से भी कीमती है...
...सिखाइये उसे- हार कैसे हज़म करें,
विजय के आनंद में हम, कैसे संयम धरें,
आप से हो सके, तो जलन से उसे बचाएं ,
सिखाइये मेरे बेटे को- खुशी कैसे मनाएं...
गुंडो से डरे नहीं, आसान है- उन से हारें नहीं...
खोलिए उस के लिए, किताबों के भंडार,
लेकिन उस को दिखाएं भी, कुदरत के शृंगार...
इन्हें जानने के लिए, दें मन को इत्मिनान,
दिखाएं भवरों की और परिंदों की उड़ान,
फूलों से महकी पहाड़ों की ढलान...
स्कूल में सिखाएं सुनना- अपने जमीर की पुकार,
झूठी तारीफ़ से बेहतर है, सीधी आयी हार...
गलत ठहरायी जाए तो भी- अपनी कल्पना अपने विचार,
इनका लें आधार, भले ही दुनिया मिलकर उसे कहे बेकार,
'जैसे को तैसे' के सीखे वह व्यवहार...
सिखाएं उसे...
सत्ता के चमचों की भीड से कैसे बचा जाए...
अपना अलग अस्तित्व, कैसे रचा जाए..
सुने सब जन की, पर करे वह मन की...
सिखाएं उसे, आंसू बहाने में कोई लाज नहीं,
बताएं उसे, साच पर कोई आंच नहीं...
सिखाएं उसे, मज़ाक का मज़ाक उडाना...
ताक़त और अक्ल बेच कर चाहे जो भी वह कमाए,
लेकिन दिल और रूह अपनी वह कभी न गंवाए,
बेटे को मेरे प्यार और दुलार दें,
पर इस प्यार से उसे बिगाड न दें..
बेसब्री का जोश सिखाएं मेरी औलाद को,
सब्र की तपिश से चमकाएं इस फ़ौलाद को...
सिखाएं उसे अपनी नीयत पर विश्वास करना...
फिर खुद सीखेगा वह, इंसानियत पर विश्वास करना...
माफ़ करिए गुरुजी, बहुत बोल गया... कितना कुछ मांग गया...
कीजिए आप से जितना बनता है... मेरे बेटे के लिये... बड़ा ही प्यारा है वह...
--योगेश दामलिंकन