Friday, February 08, 2008

"तुम जूझो!"

"सर, मुझे पहचाना?" कहता चौखट पर वह आया,
कपड़े उसके मटमैले थे मुखड़ा था कुम्हलाया

पलभर बैठा, मुसकाया और नज़रें उसने उठाईं,
बोला, "घर में अतिथि बनकर गंगामैय्या आयी!

नैहर लौटी दुल्हन जैसी आंगन में वह खेली,
साथ में ले गयी बहुत कुछ, बस, बीवी को वह भूली.

चौखट धंस गयी, बुझ गया चूल्हा, पीछे कुछ भी न छोड़ा,
जाते जाते मगर रखा पलकों में पानी थोड़ा.

हम दोनो अब उठा रहे हैं जो भी गया था रौंदा,
कीचड़ में अब बसा रहे हैं फिर एक नया घरौंदा.
"

ज़ेब टटोली मैंने तो वह खड़ा हुआ और बोला,
"पैसे न दें सर, आया हूं मैं खुद को पा के अकेला

कमर नहीं टूटी भले ही हुआ हो सब बरबाद,
कहें मुझे "तुम जूझो!!", मुझे बस दें यह आशीर्वाद!!"


-- कुसुमाग्रज की मूल मराठी कविता का भाषांतर

9 comments:

अनु said...

Damle,
Tumachya hindi che mala nehmich kautuk vatate...
Punyat rahun ata hindi shabda athavat pan nahit patkan..Hindi maitrinich chhan marathi bolayala shiktat.

स्नेहा said...

parat bhavantar....:)
kahitari original pa vachayachay kadhi lihinar....?

Jaswandi said...

mast jamata re tula!

ani tuzya duvyanmadhla ek kami zalay.. tu dilelya bloglinkvar mi ata lihit nahi.. rav ata kuthe vachaycha?

Nandan said...

jiyo, apratim jamalay.

The Curse of the X said...

an excellent read... generally marathi people aint so good at hindi; but for ur age and the proficiency.. hats off...

Nivedita Barve said...

farch chan kela ahes translation! khoopach free flowing zali ahe kavita.

विशाल said...

अप्रतिम कवितेचं तितकंच अप्रतिम भाषांतर!

Hridayesh said...

kya baat hai

Mandar Shinde said...

चांगला हिंदी अनुवाद आहे. याचा इंग्रजी अनुवाद इथं वाचा - http://aisiakshare.blogspot.com/2010/08/go-fight.html